जीवन का अर्थ कैसे खोजें? गहरे प्रश्न जो आपकी सोच बदल सकते हैं”  विक्टर फ्रैंकल की पुस्तक “Man’s Search for Meaning” से मिलने वाली अमूल्य सीख

विक्टर फ्रैंकल की पुस्तक “Man’s Search for Meaning” से मिलने वाली अमूल्य सीख

भाग–1 : संघर्ष, आशा और उद्देश्य की खोज

«”जिस व्यक्ति के पास जीने का कोई उद्देश्य होता है, वह लगभग हर कठिनाई को सह सकता है।”
— विक्टर ई. फ्रैंकल»

प्रस्तावना
कल्पना कीजिए कि एक दिन आपका घर, आपकी नौकरी, आपका धन, आपके प्रियजन—सब कुछ आपसे छिन जाए। आपके पास न आराम हो, न भविष्य की कोई निश्चितता और न ही यह भरोसा कि अगला दिन देखने को मिलेगा। ऐसे समय में क्या कोई इंसान मानसिक रूप से जीवित रह सकता है?

यह प्रश्न केवल कल्पना नहीं है। इतिहास में लाखों लोगों ने ऐसी भयावह परिस्थितियाँ झेली हैं। उन्हीं में से एक थे ऑस्ट्रिया के प्रसिद्ध मनोचिकित्सक विक्टर ई. फ्रैंकल।

उन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन वर्ष नाज़ी एकाग्रता शिविरों में बिताए। वहाँ उन्होंने भूख, अपमान, बीमारी, प्रियजनों की मृत्यु और निरंतर भय का सामना किया। फिर भी उन्होंने जीवन से हार नहीं मानी। उन्होंने इन अनुभवों से एक ऐसा सिद्धांत विकसित किया जिसने दुनिया भर में करोड़ों लोगों को प्रेरित किया—मनुष्य को जीवित रखने वाली सबसे बड़ी शक्ति सुख नहीं, बल्कि जीवन का अर्थ (Meaning) है।

इसी अनुभव का परिणाम है उनकी विश्वप्रसिद्ध पुस्तक “Man’s Search for Meaning”, जिसे आज भी आत्म-विकास, मनोविज्ञान और जीवन-दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तकों में गिना जाता है।

विक्टर फ्रैंकल कौन थे?

विक्टर एमिल फ्रैंकल का जन्म 1905 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में हुआ। बचपन से ही उन्हें यह जानने में रुचि थी कि मनुष्य क्यों जीता है और कठिन परिस्थितियों में भी कुछ लोग आशा कैसे बनाए रखते हैं।
उन्होंने चिकित्सा की पढ़ाई की और मनोचिकित्सक बने। उनका विशेष अध्ययन अवसाद, निराशा और आत्महत्या की प्रवृत्ति पर था।
लेकिन इतिहास ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था।
जब जीवन ने सब कुछ छीन लिया

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी शासन ने लाखों यहूदियों को एकाग्रता शिविरों में भेज दिया। विक्टर फ्रैंकल और उनका परिवार भी उनमें शामिल था।
उनसे उनके कपड़े, पहचान, स्वतंत्रता और सम्मान सब छीन लिया गया।
यहाँ तक कि उनकी वर्षों की शोध-पांडुलिपि भी उनसे छीन ली गई, जिस पर उन्होंने अपना पूरा जीवन लगाया था।
उनके माता-पिता, भाई और पत्नी—अधिकांश परिवारजन युद्ध के दौरान जीवित नहीं बच सके।
कल्पना कीजिए कि जिस व्यक्ति ने दूसरों को मानसिक रूप से मजबूत रहने की शिक्षा दी, उसे स्वयं जीवन की सबसे कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ा।


शिविर में उन्होंने क्या देखा?

फ्रैंकल ने देखा कि सभी कैदियों की शारीरिक स्थिति लगभग समान थी।
सबको भूख लगती थी।
सबको ठंड लगती थी।
सब पर अत्याचार होता था।
फिर भी कुछ लोग जल्दी टूट जाते थे, जबकि कुछ लोग दूसरों की सहायता करते थे, अपनी रोटी का हिस्सा बाँटते थे और आशा बनाए रखते थे।
यह देखकर उन्होंने एक महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा—
आख़िर इन दोनों प्रकार के लोगों में अंतर क्या था?
उत्तर था—
उद्देश्य।
जिन लोगों के पास जीने का कोई कारण था—अपने परिवार से मिलने की आशा, कोई अधूरा कार्य, या जीवन का कोई बड़ा उद्देश्य—वे मानसिक रूप से अधिक मजबूत बने रहे।

जीवन का अर्थ सुख नहीं, उद्देश्य है
आज अधिकांश लोग मानते हैं कि जीवन का लक्ष्य अधिक पैसा कमाना, बड़ा घर बनाना या प्रसिद्ध होना है।
लेकिन यदि केवल यही जीवन का अर्थ होता, तो दुनिया के सबसे अमीर लोग हमेशा सबसे अधिक खुश होते।

वास्तविकता अलग है।

कई सफल लोग भी तनाव, अकेलेपन और निराशा से जूझते हैं।

फ्रैंकल कहते हैं कि इंसान केवल सुख की तलाश में नहीं जीता। वह एक ऐसे उद्देश्य की तलाश में जीता है जो उसके जीवन को अर्थ दे।

आधुनिक जीवन में इस पुस्तक की आवश्यकता

आज तकनीक ने हमारे जीवन को पहले से अधिक सुविधाजनक बना दिया है।
हमारे पास स्मार्टफोन है।
इंटरनेट है।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ हैं।
मनोरंजन के अनगिनत साधन हैं।
फिर भी मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद बढ़ रहे हैं।
क्यों?
क्योंकि सुविधा और उद्देश्य अलग-अलग बातें हैं।
सुविधाएँ जीवन को आसान बना सकती हैं।
लेकिन केवल उद्देश्य ही जीवन को सार्थक बना सकता है।

एक छोटी-सी कहानी

एक बार एक वृद्ध माली से किसी ने पूछा—
“आप इतनी उम्र में भी रोज़ पेड़ क्यों लगाते हैं? इनके फल तो शायद आप कभी नहीं खाएँगे।”

माली मुस्कुराया और बोला—
“मैंने भी उन पेड़ों के फल खाए हैं जिन्हें किसी और ने लगाया था। अब मेरी बारी है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ छोड़ जाऊँ।”
उस वृद्ध के लिए पेड़ लगाना केवल काम नहीं था।
वह उसके जीवन का उद्देश्य था।
यही उद्देश्य उसे हर सुबह उत्साह के साथ उठने की प्रेरणा देता था।

हम क्या सीख सकते हैं?

यदि आपका जीवन केवल वेतन, पद या दूसरों से आगे निकलने तक सीमित है, तो सफलता मिलने के बाद भी भीतर खालीपन रह सकता है।

लेकिन यदि आपका उद्देश्य सीखना, परिवार का सहारा बनना, समाज में योगदान देना, ईमानदारी से काम करना और स्वयं को बेहतर बनाना है, तो साधारण जीवन भी गहरे संतोष से भर सकता है।

जीवन का अर्थ हमें कोई और नहीं देता।

उसे हमें अपने कर्म, अपने संबंधों और अपने मूल्यों से स्वयं बनाना पड़ता है।



भाग–1 का निष्कर्ष

विक्टर फ्रैंकल का जीवन हमें सिखाता है कि मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति उसकी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि उनका सामना करने का उसका दृष्टिकोण है।

जब तक हमारे पास जीने का कोई उद्देश्य है, तब तक सबसे कठिन समय भी हमें पूरी तरह पराजित नहीं कर सकता।


जीवन का उद्देश्य एक बार तय होकर समाप्त नहीं हो जाता।
हर उम्र में उसका अर्थ बदल सकता है।
बचपन में सीखना उद्देश्य होता है।
युवावस्था में स्वयं को स्थापित करना।
मध्य आयु में परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना।
बुढ़ापे में अनुभव बाँटना और अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करना।
इसलिए जीवन का अर्थ खोजने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।

स्वयं से पूछने योग्य पाँच प्रश्न
हर सप्ताह स्वयं से ये प्रश्न पूछिए—
– क्या मैं केवल पैसा कमा रहा हूँ, या कुछ सार्थक भी कर रहा हूँ?
– यदि आज मेरा अंतिम दिन हो, तो क्या मुझे अपने जीवन पर संतोष होगा?
– क्या मैं अपने परिवार और समाज के लिए उपयोगी हूँ?
– क्या मैं दूसरों से तुलना कर रहा हूँ या स्वयं को बेहतर बना रहा हूँ?
– क्या मेरे जीवन का कोई ऐसा उद्देश्य है जो कठिन समय में भी मुझे आगे बढ़ाए?
यदि इन प्रश्नों के उत्तर ईमानदारी से खोजेंगे, तो जीवन की दिशा अधिक स्पष्ट होने लगेगी।

भाग–2 : पुस्तक की 10 सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाएँ

पिछले भाग में हमने जाना कि विक्टर फ्रैंकल ने नाज़ी एकाग्रता शिविरों में अमानवीय परिस्थितियों का सामना करते हुए यह समझा कि मनुष्य को जीवित रखने वाली सबसे बड़ी शक्ति उसका उद्देश्य (Meaning) है।

अब आइए इस पुस्तक की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षाओं को समझते हैं।

1. हर परिस्थिति में हमारे पास एक स्वतंत्रता रहती है

फ्रैंकल लिखते हैं कि मनुष्य से उसका धन, घर, सम्मान, नौकरी और यहाँ तक कि उसकी स्वतंत्रता भी छीनी जा सकती है। लेकिन एक चीज़ कभी नहीं छीनी जा सकती—
किसी परिस्थिति के प्रति अपनी प्रतिक्रिया चुनने की स्वतंत्रता।
यही विचार इस पुस्तक का सबसे प्रसिद्ध संदेश है।

उदाहरण

मान लीजिए दो लोगों की नौकरी चली जाती है।

पहला व्यक्ति स्वयं को पूरी तरह असफल मानकर प्रयास छोड़ देता है।

दूसरा व्यक्ति कुछ समय दुखी होता है, फिर नई कौशल सीखता है और नई शुरुआत करता है।

दोनों की परिस्थिति एक जैसी थी, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया अलग थी।

2. जीवन हर व्यक्ति से एक अलग उत्तर चाहता है

हम अक्सर पूछते हैं—

“जीवन मुझे क्या देगा?”

फ्रैंकल कहते हैं कि सही प्रश्न है—
“जीवन मुझसे क्या अपेक्षा करता है?”
शायद किसी के जीवन का उद्देश्य अपने माता-पिता की सेवा करना हो।
किसी का उद्देश्य बच्चों को शिक्षित करना हो।
किसी का उद्देश्य ईमानदारी से अपना व्यवसाय चलाना हो।
दूसरों का उद्देश्य कभी आपका उद्देश्य नहीं हो सकता।

3. दुख हमेशा व्यर्थ नहीं होता

कोई भी व्यक्ति दुख नहीं चाहता।
लेकिन यदि दुख को टाला नहीं जा सकता, तो उससे सीख अवश्य ली जा सकती है।
कई लोग बीमारी के बाद स्वास्थ्य का महत्व समझते हैं।
कई लोग असफलता के बाद जीवन की नई दिशा खोज लेते हैं।
कई लोग किसी प्रियजन को खोने के बाद दूसरों की सेवा को अपना उद्देश्य बना लेते हैं।
दुख अपने आप में महान नहीं होता, लेकिन उससे मिलने वाली सीख महान हो सकती है।

4. सफलता का पीछा मत कीजिए
आज अधिकांश लोग सफलता को ही जीवन का अंतिम लक्ष्य मानते हैं।
लेकिन फ्रैंकल का विचार अलग है।
वे कहते हैं—
जब आप किसी सार्थक उद्देश्य के लिए पूरी ईमानदारी से काम करते हैं, तो सफलता अक्सर उसका परिणाम बन जाती है।
यदि आप केवल प्रसिद्धि के पीछे भागेंगे, तो बेचैनी बढ़ सकती है।
यदि आप उत्कृष्ट कार्य करेंगे, तो सम्मान स्वयं आएगा।

5. तुलना जीवन का सबसे बड़ा चोर है
आज सोशल मीडिया पर हम दूसरों का केवल सबसे अच्छा पक्ष देखते हैं।
नई कार।
विदेश यात्रा।
नई नौकरी।
महंगे कपड़े।
लेकिन हम उनके संघर्ष नहीं देखते।
जब तुलना बढ़ती है, तो कृतज्ञता कम हो जाती है।
फ्रैंकल का संदेश है—
अपने उद्देश्य पर ध्यान दें, दूसरों की उपलब्धियों पर नहीं।


6. प्रेम जीवन को अर्थ देता है

फ्रैंकल ने लिखा कि कठिन परिस्थितियों में भी वे अपनी पत्नी की स्मृतियों से शक्ति प्राप्त करते थे।
उन्होंने अनुभव किया कि प्रेम केवल किसी व्यक्ति की उपस्थिति का नाम नहीं है।
सच्चा प्रेम हमें मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
आज भी परिवार, मित्र और सच्चे संबंध कठिन समय में सबसे बड़ा सहारा बनते हैं।

7. काम केवल वेतन नहीं होना चाहिए

यदि कोई व्यक्ति केवल महीने के अंत में वेतन पाने के लिए काम करता है, तो धीरे-धीरे उसका उत्साह कम हो सकता है।

लेकिन यदि वही व्यक्ति अपने काम को समाज की सेवा मानता है, तो वही काम प्रेरणा का स्रोत बन जाता है।
उदाहरण
एक शिक्षक केवल पढ़ा नहीं रहा होता।
वह भविष्य गढ़ रहा होता है।
एक किसान केवल खेती नहीं करता।
वह लाखों लोगों का भोजन तैयार करता है।
एक सफाई कर्मचारी केवल सफाई नहीं करता।
वह पूरे समाज के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।
जब काम का अर्थ बदलता है, तब काम का आनंद भी बदल जाता है।

8. आशा कभी मत छोड़िए
एकाग्रता शिविरों में फ्रैंकल ने देखा कि जो लोग पूरी तरह आशा खो देते थे, वे मानसिक रूप से जल्दी टूट जाते थे।
इसके विपरीत, जिनके पास भविष्य का कोई सपना था, वे अधिक समय तक संघर्ष करते रहे।
आशा कोई कल्पना नहीं है।
यह जीवन की ऊर्जा है।


9. छोटी-छोटी खुशियों को पहचानिए
हम अक्सर सोचते हैं—
“जब बड़ी सफलता मिलेगी, तब खुश होंगे।”
लेकिन जीवन की सबसे सुंदर बातें अक्सर छोटी होती हैं।
सुबह की धूप।
परिवार के साथ भोजन।
किसी बच्चे की मुस्कान।
एक अच्छा मित्र।
स्वस्थ शरीर।
यदि हम इन्हें महसूस करना सीख जाएँ, तो जीवन अधिक संतोषपूर्ण हो सकता है।

10. जीवन हर दिन नया अर्थ देता है
जीवन का उद्देश्य एक बार तय होकर समाप्त नहीं हो जाता।
हर उम्र में उसका अर्थ बदल सकता है।
बचपन में सीखना उद्देश्य होता है।
युवावस्था में स्वयं को स्थापित करना।
मध्य आयु में परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना।
बुढ़ापे में अनुभव बाँटना और अगली पीढ़ी का मार्गदर्शन करना।
इसलिए जीवन का अर्थ खोजने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती।

स्वयं से पूछने योग्य पाँच प्रश्न
हर सप्ताह स्वयं से ये प्रश्न पूछिए—
– क्या मैं केवल पैसा कमा रहा हूँ, या कुछ सार्थक भी कर रहा हूँ?
– यदि आज मेरा अंतिम दिन हो, तो क्या मुझे अपने जीवन पर संतोष होगा?
– क्या मैं अपने परिवार और समाज के लिए उपयोगी हूँ?
– क्या मैं दूसरों से तुलना कर रहा हूँ या स्वयं को बेहतर बना रहा हूँ?
– क्या मेरे जीवन का कोई ऐसा उद्देश्य है जो कठिन समय में भी मुझे आगे बढ़ाए?


भाग–2 का निष्कर्ष

विक्टर फ्रैंकल की सबसे बड़ी शिक्षा यह है कि जीवन का अर्थ हमें परिस्थितियाँ नहीं देतीं, बल्कि हम अपने निर्णयों, कर्मों और मूल्यों से उसे बनाते हैं।

जब उद्देश्य स्पष्ट होता है, तो कठिनाइयाँ भी हमें तोड़ने के बजाय मजबूत बनाना शुरू कर देती हैं।

यही कारण है कि यह पुस्तक केवल मनोविज्ञान की नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला की पुस्तक मानी जाती है।

भाग–3 : भारतीय दर्शन, प्रेरक उदाहरण और आधुनिक जीवन में इसका महत्व
पिछले भाग में हमने पुस्तक की प्रमुख शिक्षाओं को समझा। अब प्रश्न यह है—
क्या ये विचार केवल पश्चिमी मनोविज्ञान तक सीमित हैं, या भारतीय दर्शन भी यही सिखाता है?
आश्चर्य की बात है कि विक्टर फ्रैंकल के अनेक विचार भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपरा से गहरे मेल खाते हैं।

1. श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश
भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म पर है, फल पर नहीं।
इसका अर्थ यह नहीं कि परिणाम महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह कि यदि हमारा ध्यान केवल परिणाम पर रहेगा, तो चिंता बढ़ेगी। यदि हमारा ध्यान श्रेष्ठ कर्म पर रहेगा, तो मन अधिक शांत रहेगा।
विक्टर फ्रैंकल भी यही कहते हैं कि जीवन का अर्थ केवल सफलता प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाना है।
जब व्यक्ति उद्देश्य के साथ कर्म करता है, तब परिणाम चाहे देर से मिले, उसका मन विचलित नहीं होता।

2. बुद्ध का दृष्टिकोण
भगवान बुद्ध ने सिखाया कि जीवन में दुख है, लेकिन दुख से मुक्ति भी संभव है।
दुख का कारण केवल बाहरी परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि हमारे मन की आसक्ति, अपेक्षाएँ और गलत दृष्टिकोण भी हैं।
फ्रैंकल भी यही बताते हैं कि हर दुख हमें तोड़ता नहीं है। यदि हम उसका अर्थ खोज लें, तो वही दुख हमें अधिक संवेदनशील और मजबूत बना सकता है।

3. स्वामी विवेकानंद का संदेश
स्वामी विवेकानंद कहते थे—
“उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक मत रुको।”
उनके लिए जीवन का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं था, बल्कि मानवता की सेवा और आत्म-विकास था।
यही बात फ्रैंकल की पुस्तक में भी दिखाई देती है।
जिस व्यक्ति का उद्देश्य केवल स्वयं तक सीमित नहीं होता, वह कठिन परिस्थितियों में भी अधिक दृढ़ रहता है।

4. महात्मा गांधी का उदाहरण
महात्मा गांधी के पास न बड़ी सेना थी और न ही अपार धन।
फिर भी उन्होंने सत्य, अहिंसा और स्वतंत्रता को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया।
उन्हें जेल हुई, अपमान सहना पड़ा और अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
लेकिन उनका उद्देश्य इतना स्पष्ट था कि वे संघर्ष से पीछे नहीं हटे।
यह हमें सिखाता है कि स्पष्ट उद्देश्य साधारण व्यक्ति को भी असाधारण बना सकता है।

5. नेल्सन मंडेला का जीवन
नेल्सन मंडेला ने 27 वर्ष जेल में बिताए।
यदि वे केवल अपनी पीड़ा पर ध्यान देते, तो शायद वे टूट जाते।
लेकिन उनका उद्देश्य था—अपने देश में समानता और न्याय स्थापित करना।
उद्देश्य ने उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।

6. जापान से सीख
जापान में “इकिगाई” की अवधारणा बहुत प्रसिद्ध है।
इकिगाई का अर्थ है—सुबह उठने का कारण।
यह केवल नौकरी नहीं है।
यह वह उद्देश्य है जिसके कारण व्यक्ति हर दिन उत्साह के साथ जीवन जीता है।
कई जापानी लोग वृद्धावस्था तक सक्रिय रहते हैं, क्योंकि उनके जीवन में केवल काम नहीं, बल्कि उद्देश्य भी होता है।

7. आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती
आज अधिकांश लोग तीन जालों में फँस जाते हैं—
पहला—तुलना।
दूसरों की सफलता देखकर अपनी खुशी खो देना।
दूसरा—उपभोक्तावाद।
यह मान लेना कि अधिक सामान खरीदने से जीवन बेहतर हो जाएगा।
तीसरा—उद्देश्यहीन व्यस्तता।
दिनभर व्यस्त रहना, लेकिन यह न जानना कि आखिर यह सब क्यों कर रहे हैं।
फ्रैंकल हमें इन तीनों जालों से बाहर निकलने की प्रेरणा देते हैं।

8. एक वास्तविक प्रेरक उदाहरण
मान लीजिए दो लोग एक ही कंपनी में काम करते हैं।
पहला व्यक्ति हर दिन केवल वेतन का इंतजार करता है।
वह सोमवार से शुक्रवार तक किसी तरह समय बिताता है।
दूसरा व्यक्ति अपने काम को सीखने, लोगों की सहायता करने और स्वयं को बेहतर बनाने का अवसर मानता है।
दोनों की नौकरी एक जैसी है।
लेकिन उनके जीवन की गुणवत्ता अलग है।
अंतर केवल उद्देश्य का है।

9. क्या धन महत्वपूर्ण नहीं है?
धन आवश्यक है।
अच्छा भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित जीवन के लिए धन चाहिए।
लेकिन धन को उद्देश्य नहीं, साधन बनाना चाहिए।
जब पैसा ही जीवन का अंतिम लक्ष्य बन जाता है, तो संतोष दूर होता जाता है।
लेकिन जब पैसा किसी बड़े उद्देश्य—परिवार, सेवा, शिक्षा या समाज के हित—का माध्यम बनता है, तब उसका महत्व और बढ़ जाता है।

10. उद्देश्य कैसे खोजें?
यदि आपको अपना उद्देश्य स्पष्ट नहीं है, तो स्वयं से ये प्रश्न पूछिए—
– कौन-सा कार्य करते समय समय का पता नहीं चलता?
– किस कार्य से दूसरों को लाभ मिलता है?
– यदि धन की चिंता न हो, तो मैं अपना समय किस काम में लगाना चाहूँगा?
– मैं अपने जीवन के अंत में किस बात पर गर्व करना चाहूँगा?
– लोग मुझे किस कारण याद रखें, यह मैं चाहता हूँ?
इन प्रश्नों के उत्तर धीरे-धीरे आपके जीवन की दिशा स्पष्ट करेंगे।

एक छोटी प्रेरक कहानी
एक वृद्ध कुम्हार अपने बेटे के साथ मिट्टी के घड़े बना रहा था।
बेटे ने पूछा—
“पिताजी, आप हर घड़ा इतनी सावधानी से क्यों बनाते हैं? अधिकांश लोग तो बस पानी भरने के लिए खरीदते हैं।”
वृद्ध मुस्कुराए और बोले—
“बेटा, मैं घड़ा नहीं बनाता, मैं किसी परिवार के जीवन का हिस्सा बनाता हूँ। इसी सोच से मेरे हाथों में लापरवाही नहीं आती।”
काम वही था।
लेकिन दृष्टिकोण अलग था।
और यही दृष्टिकोण साधारण काम को भी अर्थपूर्ण बना देता है।

ज्ञान मंथन

पंकज पोखरियाल

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